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सोमवार, अक्तूबर 06, 2014

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lal-kitab-1952-page-50

फरमान नंबर 7 बुत ने रूह से अपना घर क्यों पूछ लिया राशी मालिक लेख की होती, या कि होता ग्रह मंडल हो
मिल के कटेगी उम्र सौ दोनों की, कुंडली जन्म ख्वाह चन्द्र हो
घर पहले की उम्र सौ साला, तीन नब्बे दस बारह है
85 उम्र 7वें की लेते, 80 होती घर 6 की है
पौन सदी या 75 साल, गुरु मंदिर घर 2 की है
घर और ग्रह की उम्र जुदा पर, गुजरती दो की इकठ्ठी है
गुरु जगत की उम्र 75, बुध केतु 80 होती है
शुक्र चन्द्र की उम्र 85, शनि-मंगल-राहू 90 है
स्त्री ग्रह जब मिले नरों से, उम्र 96 होती है
साथ मिले जब बुध पापी का, वही 85 होती है
रवि मालिक है पोरी सदी का. उम्र लम्बी उस की होती है
ग्रहण लगे जब चन्द्र रवि को, साल त्रै (तीन) कम हॉट है


1. इस जगह लिखी हुई उम्रें ग्रह और राशी की अपनी-अपनी हैं मगर इन उम्रों से इंसानी उम्र की कोई हदबंदी नहीं होती | फर्जन खाना नंबर 1 जिसकी उम्र है 100 साल वहां (खाना नंबर 1 है ) बैठा हो बृहस्पत जिसकी उम्र 75 साल गिनी है | तो मतलब यह होगा कि एसे टेवे वाले को बृहस्पत ज्यादा से ज्यादा अपनी (बृहस्पत) उम्र तक यानि 75 साल तक बुरा या भला असर (जैसा कि टेवे के मुताबिक हो) दे सकता है | इसी तरह खाना नंबर 6 में जिसकी उम्र 90 साल हा अगर सूरज बैठा हो जिसकी उकर 100 साल मानते हैं तो मुराद यह होगी कि ऐसे टेवे वाले को सूरज नंबर 6 का ग्रह ज्यादा से ज्यादा 80 साल तक अपना असर जैसा भी टेवे के मुताबिक हो, दे सकता है |

2. बवक्त जन्म कुंडली में चन्द्र के साथ केतु हो चन्द्र ग्रहण और जब सूरज के साथ राहू हो तो सूरज ग्रहण कहेंगे | लाल किताब - पन्ना नंबर - 50 लाल किताब पन्ना नंबर 50


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